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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 146
धनं यो बिभृयाद्‌ भ्रातुर्मृतस्य स्त्रियमेव च । सोऽपत्यं भ्रातुरुत्पाद्य दद्यात्तस्यैव तद्धनम्‌ ।।
निःसन्तान मरे हुए (बड़े) भाई के धन तथा स्त्री की जो भाई रक्षा करे, वह (छोटा भाई अर्थात्‌ उस स्त्री का देवर) नियोग (९।५९-६०) धर्म से स्त्री में सन्तान उत्पन्न करके मृत भाई का सब धन उसी पुत्र को दे देवे।
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