धनं यो बिभृयाद् भ्रातुर्मृतस्य स्त्रियमेव च ।
सोऽपत्यं भ्रातुरुत्पाद्य दद्यात्तस्यैव तद्धनम् ।।
निःसन्तान मरे हुए (बड़े) भाई के धन तथा स्त्री की जो भाई रक्षा करे, वह (छोटा भाई अर्थात् उस स्त्री का देवर) नियोग (९।५९-६०) धर्म से स्त्री में सन्तान उत्पन्न करके मृत भाई का सब धन उसी पुत्र को दे देवे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।