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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 143
अनियुक्तासुतश्चैव पुत्रिण्याप्तश्च देवरात्‌ । उभौ तौ नार्हतो भागं जारजातककामजौ ।।
अनियोग (९।५९-६१) से उत्पन्न अथवा पुत्रवती स्त्री में नियोग (गुरु आदि की आज्ञा से देवरादि से) उत्पन्न पुत्र क्रमशः जार तथा कामवासना से उत्पन्न होने से पितृ धन के भागी नहीं होते हैं।
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