पुत्रिका-पुत्र (नाती-धेवता अर्थात् पुत्रिका-पुत्र, श्राद्ध करते समय) पहला पिण्ड माता के लिए, दूसरा पिण्ड उसके पिता (अपने नाना) के लिए और तीसरा पिण्ड माता के पितामह (अपने परनाना) के लिए दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।