नैता रूपं परीक्षन्ते नासां वयसि संस्थितिः ।
सुरूपं वा विरूपं वा पुमानित्येव भुञ्जते ।।
ये (स्त्रियाँ पुरुष के) सुन्दर रूप की परीक्षा नहीं करती, युवावस्था आदि में आदर (विशेष चाहना) नहीं करतीं, किन्तु "पुरुष है" इसी विचार से सुन्दर या कुरूप पुरुष के साथ सम्भोग करती है।
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