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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 136
अकृता वा कृता वाऽपि यं विदेत्सदृशात्सुतम्‌ । पौत्री मातामहस्तेन दद्यात्पिण्डं हरेद्धनम्‌ ।।
'पुत्रिका’ (९।१२७) की गयी अथवा नहीं की गयी पुत्री के गर्भ से समान जाति वाले पति के द्वारा उत्पन्न पुत्र से ही नाना पुत्रवान्‌ होता है, (अतएव) वह (पुत्र) ही नाना के लिए पिण्डदान करे तथा पुत्र उसका सब धन प्राप्त करे।
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