किसी प्रकार (दुर्भाग्य आदि के कारण से) विना पुत्र उत्पन्न किये ही 'पुत्रिका’ (९।१२७) आदि मर जाय तो उसके पिता (श्वसुर) के धन को 'पुत्रिका' का पति ही निःसन्देह होकर ग्रहण करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।