पुत्रिकायां कृतायां तु यदि पुत्रोऽनुजायते ।
समस्तत्र विभागः स्याज्ज्येष्ठता नास्ति हि स्त्रियाः ।।
'पुत्रिका' (९।१२७) करने के बाद यदि किसी को पुत्र उत्पन्न हो जाय तो उन दोनों (पुत्रिका-पुत्र अर्थात् धेवता तथा पौत्र अर्थात् पोतो) को समान भाग मिलते हैं क्योंकि ज्येष्ठ होने पर भी 'उद्धार' (९-१११-११२) अर्थात् अतिरिक्त भाग निकालने में ज्येष्ठत्व नहीं होता।
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