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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 133
पौत्रदौहित्रयोलोके न विशेषोऽस्ति धर्मतः । तयोर्हि मातापितरौ सम्भूतौ तस्य देहतः ।।
संसार में पौत्र (पुत्र का पुत्र = पोता) तथा दौहित्र (धेवता, नाती अर्थात्‌ 'पुत्रिका' (९।१२७) से पुत्र) में कोई भेद नहीं हैं; क्योंकि उन दोनों के माता-पिता उसी के शरीर से उत्पन्न हुए हैं।
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