माता का (विवाहादि-काल में पिता या माता आदि से प्राप्त हुआ) धन उसकी कन्या (अविवाहित पुत्री) का ही भाग होता है तथा पुत्रहीन नाना के सब धन को दौहित्र (धंवता, नाती अर्थात् पूर्व (९।१ २७) वचनानुसार 'पुत्रिका' की गयी कन्या का पुत्र) ही प्राप्त करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।