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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 13
पानं दुर्जनसंसर्गः पत्या च विरहोऽटनम्‌ । स्वप्नोऽ न्यगेहवासश्च नारीसन्दूषणानि षट्‌ ।।
(मद्यादि मादक द्रव्यों का) पीना (या प्रकारान्तर से सेवन करना), दुष्ट का संसर्ग, पति के साथ विरह, इधर-उधर घूमना, (असमय में) सोना और दूसरे के घर में निवास करना - ये स्त्रियों के छः दोष हैं (अतएव इनसे इन स्त्रियों को बचाना चाहिये)।
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