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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 127
अपुत्रो5 नेन विधिना सुतां कुर्वीत पुत्रिकाम्‌ । यदपत्यं भवेदस्यां तन्मम स्यात्स्वधाकरम्‌ ।।
पुत्र-हीन पिता कन्या-दान करते समय - "इस कन्या से जो पुत्र होगा वह मेरी श्राद्धादि पारलौकिक क्रिया करनेवाला होगा" ऐसा जामाता (जमाई-दामाद) से कहकर उस कन्या को 'पुत्रिका' करे।
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