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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 126
जन्मज्येष्ठेन चाह्वानं सुब्रह्मण्यास्वपि स्मृतम्‌ । यमयोश्चैव गर्भेषु जन्मतो ज्येष्ठता स्मृता ।।
(इन्द्र के आह्वान के लिए प्रयुक्त होने वाले) “सुब्रह्मण्या' नामक मन्त्र में भी जन्म से ही ज्येष्ठत्व कहा गया है तथा गर्भ के एक काल में आधान होने पर भी यमज सन्तानों भी जन्म ही ज्येष्ठत्व कहा गया है।
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