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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 124
ज्येष्ठस्तु जातोऽज्येष्ठायां हरेहूषभषोडशाः । ततः स्वमातृतः शेषा भजेरन्निति धारणा ।।
ज्येष्ठ (प्रथम विवाहित) माता में उत्पन्न (जन्मकालानुसार भी) ज्येष्ठ पुत्र प्रन्द्रह गायों के साथ एक बैल ले, तदनन्तर शेष स्त्रियो में उत्पन्न पुत्र माताओं के विवाहक्रम से बचे हुए धन में से अपना-अपना भाग लें।
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