यदि बड़ी (प्रथम विवाहिता) स्त्री का पुत्र छोटा हो तथा छोटी (बाद में विवाहित) स्त्री का पुत्र बड़ा हो तो वहाँ (“माताओं के विवाह क्रम से उन पुत्रों की बड़ाई छोटाई का विचार होगा या पुत्रों के जन्मक्रम से होगा?” ऐसा सन्देह उपस्थित होने पर) विभाजन (धन का बँटवारा) किस प्रकार किया जाय अर्थात् किस पुत्र को बड़ा तथा किस पुत्र को छोटा मानकर पितृ-धन को भाइयों में बाटा जाय एवं किस पुत्र का कितना 'उद्धार' (९।११२-११४) हो ऐसा सन्देह हो तो-
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