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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 121
उपसर्जनं प्रधानस्य धर्मतो नोपपद्यते । पिता प्रधानं प्रजने तस्माद्धर्मेण तं भजेत्‌ ।।
उपसर्जन (छोटे भाई के द्वारा ज्येष्ठ भाई की स्त्री में नियोग (९।५९-६१) से उत्पन्न अप्रधान) पुत्र धर्मानुसार प्रधान (साक्षात्‌ पिता के द्वारा उत्पन्न पुत्र के भाग। 'उद्धार' (९।११२-११४) अर्थात्‌ अतिरिक्त भाग को) पाने का अधिकारी नहीं होता; क्योंकि अपने क्षेत्र (स्त्री) में सन्तान उत्पन्न करने में पिता ही मुख्य है, अत: धर्म से उस पुत्र को पितृव्यों के साथ पूर्व वचन के अनुसार समान भाग लेना चाहिए।
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