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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 12
अरक्षिता गृहे रुद्धाः पुरुषैराप्तकारिभिः । आत्मानमात्मना यास्तु रक्षेयुस्ताः सुरक्षिताः ।।
(यदि स्त्रियाँ धर्मविरुद्ध बुद्धि होने से अपनी रक्षा स्वयं नहीं करती तो) आप्त एवं आज्ञाकारी पुरुषों से घर में रोकी गयी भी वे स्त्रियाँ अरक्षित हैं, जो स्त्रियाँ धर्मानुकूल बुद्धि होने से अपनी रक्षा स्वयं करती हैं, वे ही सुरक्षित हैं (अतः पति आदि अभिभावकों को चाहिये कि धर्म का सत्फल बतलाकर उन्हें संयम में रहने का उपदेश दें)।
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