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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 118
स्वाभ्यः स्वाभ्यस्तु कन्याभ्यः प्रदद्यु्रातरः पृथक्‌ । स्वात्स्वादंशाच्चतुर्भागं पतिताः स्युरदित्सवः ।।
अपने-अपने भाग का चतुर्थांश भाग (अविवाहित सोदर्या) बहनों के लिए (ब्राह्मणादि चारों वर्ण के) भाई देवें। यदि वे (उन बहनों के विवाह-संस्कारार्थ) चतुर्थांश नहीं देना चाहिते हैं तो वे पतित होते हैं।
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