एवं समुद्धृतोद्धारे समानंशान्प्रकल्पयेत् ।
उद्धारे5 नुद्धुते त्वेषामियं स्यादंशकल्पना ।।
इस प्रकार (९।११२-११५) सबके उद्धार (अतिरिक्त भाग विशेष) को पृथक् कर (शेष धन-राशि को) समान भाग कर ले; "उद्धार" पृथक् नहीं करने पर भाइयों के भाग की कल्पना इस (९1११७) प्रकार करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।