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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 116
एवं समुद्धृतोद्धारे समानंशान्प्रकल्पयेत्‌ । उद्धारे5 नुद्धुते त्वेषामियं स्यादंशकल्पना ।।
इस प्रकार (९।११२-११५) सबके उद्धार (अतिरिक्त भाग विशेष) को पृथक्‌ कर (शेष धन-राशि को) समान भाग कर ले; "उद्धार" पृथक्‌ नहीं करने पर भाइयों के भाग की कल्पना इस (९1११७) प्रकार करे।
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