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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 113
ज्येष्ठश्चैव कनिष्ठश्च संहरेतां यथोदितम्‌ । येऽन्ये ज्येष्ठकनिष्ठाभ्यां तेषां स्यान्मध्यमं धनम्‌ ।।
(यदि तीन से अधिक भाई हो तो) सबसे बड़े और छोटे भाई का 'उद्धार' क्रमशः बीसवाँ तथा अस्सीवाँ भाग और अन्य मध्यम (मझिला; सझिला आदि) भाइयों का चालीसवाँ भाग 'उद्धर' भागर पितृधन में निकालना चाहिये। पहले ही पूर्ववर्णित क्रम से निकालकर शेष धन का समान-समान भाग सब भाइयों को प्राप्तव्य होता है।
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