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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 112
ज्येष्ठस्य विंश ऊद्धारः सर्वद्रव्याच्च यद्वरम्‌ । ततोऽर्धं मध्यमस्य स्यात्तुरीयं तु यवीयसः ।।
पिता के सम्पूर्ण धन में से ज्येष्ठ भाई का बीसवाँ भाग तथा श्रेष्ठ पदार्थ (चाहे वह एक ही हो) कनिष्ठ (सबसे छोटे भाई का अस्सीवाँ भाग और मध्यम (मझिला) भाई का चालीसवाँ भाग उद्धार होता है।
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