मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 111
एवं सह वसेयुर्वा पृथग्वा धर्मकाम्यया । पृथग्विवर्धते धर्मस्तस्माद्धर्म्या पृथकक्रिया ।।
इस प्रकार (९।१०५-११०) वे (छोटे भाई) एक साथ रहें अथवा धर्म की इच्छा से अलग-अलग रहें । अलग-अलग रहने से (पञ्जमहायज्ञादि कार्य सब भाइयों को अलग-अलग ही करने के कारण!) धर्मबुद्धि होती है, अतएव भाइयों को अलग-अलग रहना भी धर्मयुक्त है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें