एवं सह वसेयुर्वा पृथग्वा धर्मकाम्यया ।
पृथग्विवर्धते धर्मस्तस्माद्धर्म्या पृथकक्रिया ।।
इस प्रकार (९।१०५-११०) वे (छोटे भाई) एक साथ रहें अथवा धर्म की इच्छा से अलग-अलग रहें । अलग-अलग रहने से (पञ्जमहायज्ञादि कार्य सब भाइयों को अलग-अलग ही करने के कारण!) धर्मबुद्धि होती है, अतएव भाइयों को अलग-अलग रहना भी धर्मयुक्त है।
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