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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 11
अर्थस्य सङ्ग्रहे चैनां व्यये चैव नियोजयेत्‌ । शौचे धर्मेऽ न्नपक्त्यां च पारिणाह्यस्य वेक्षणे ।।
(पिता, पति या पुत्रादि अभिभावक) उस (स्त्री) को धन के संग्रह, व्यय, वस्तु तथा पदार्थो की शुद्धि, पति तथा अग्नि की सेवा (पति एवं गुरुजन को शुश्रूषा तथा अग्निहोत्र कर्म), घर तथा घर के वर्तन आदि की सफाई में नियुक्त करे।
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