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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 108
पितेव पालयेत्पुत्रान्‌ ज्येष्ठो भ्रातृन्यवीयसः । पुत्रवच्चापि वर्तेरन्‌ ज्येष्ठे भ्रातरि धर्मतः ।।
ज्येष्ठ भाई छोटे भाइयों का पालन पिता के समान करे तथा छोटे भाई ज्येष्ठ भाई में धर्म के लिए पुत्र के समान वर्ताव करें अर्थात्‌ ज्येष्ठ भाई को पिता मानें।
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