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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 104
ऊर्ध्व पितुश्च मातुश्च समेत्य भ्रातरः समम्‌ । भजेरन्पैतृकं रिक्थमनीशास्ते हि जीवतोः ।।
माता-पिता के मरने पर सब भाई एकत्रित होकर पैतृक (पितृ-सम्बन्धी) सम्पत्ति को बराबर बाँट लें; क्योंकि (वे पुत्र) उन दोनों (माता-पिता) के जीवित रहते सम्पति लेने में असमर्थ रहते हैं।
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