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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 101
अन्योन्यस्याव्यभीचारो भवेदामरणान्तिकः । एष धर्मः समासेन ज्ञेयः स्त्रीपुंसयोः परः ।।
मरण-पर्यन्त स्त्री-पुरुष का परस्पर में व्यभिचार अर्थात्‌ धर्मार्थकाम-विषयक कार्ये में पार्थक्य (अलगाव) न होवे, यही संक्षेप में स्त्री-पुरुष का धर्म जानना चाहिये।
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