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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 10
न कश्चिद्योषितः शक्तः प्रसह्य परिरक्षितुम्‌ । एतैरुपाययोगैस्तु शक्यास्ताः परिरक्षितुम्‌ ।।
कोई (पिता, पति, पुत्रादि) बलात्कार कर स्त्री को रक्षा नहीं कर सकता, किन्तु इन (आगे कहे जाने वाले) उपायों से उन (स्त्रियों) की रक्षा की जा सकती है।
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