अप्सु भूमिवदित्याहुः स्त्रीणां भोगे च मैथुने ।
अब्जेषु चैव रत्नेषु सर्वेष्वश्ममयेषु च ।।
पानी (तालाब, कुआँ, नहर आदि) स्री-भोग, मैथुन, कमल, रत्न और पत्थर को बनी सब प्रकार की वस्तुओं के विषय में असत्य बोलने पर भूमि के विषय में असत्य बोलने के समान पाप लगता है अर्थात् वह मनुष्य सब बान्धवों को नरक में डालता (या उनकी हत्या करने के समान फल पाता) है।
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