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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 91
यमो वैवस्वतो देवो यस्तवैष हृदि स्थितः । तेन चेदविवादस्ते मा गङ्गां मा कुरून्‌ गमः ।।
तुम्हारे हदय में रहनेवाला जो यह यम अर्थात्‌ दण्डकर्त्ता परमात्मा रहता है, उसके साथ यदि तुम्हारा विवाद नहीं है, तब तुम (असत्य-भाषणरूप पापकर्म के प्रायश्चित करने के लिए) गङ्गाजी और कुरुक्षेत्र मत जाओ अर्थात्‌ सत्य बोलने पर पाप नहीं लगने के कारण तुम्हें गङ्गाजी या कुरुक्षेत्र जाकर प्रायश्चित्त करने की आवश्यकता नहीं है।
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