सोऽस्य कार्याणि सम्पश्येत्सभ्यैरेव त्रिभिर्वृतः ।
सभामेव प्रविश्याग्र्यामासीनः स्थित एव वा ।।
वह (राजा के द्वारा नियुक्त विद्वान् ब्राह्मण) भी तीन सदस्यों (धार्मिक एवं कार्यज्ञ ब्राह्मणों) के साथ ही न्यायालय में जाकर आसन पर बैठकर या खड़ा होकर (राजा के देखने योग्य उन) कार्यो को देखे अर्थात् उन मुकदमों का फैसला करे।
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