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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 89
जन्मप्रभृति यत्किञ्चित्पुण्यं भद्र त्वया कृतम्‌ । तत्ते सर्व॑ शुनो गच्छेद्यदि ब्रूयास्त्वमन्यथा ।।
हे भद्र! यदि तुम अन्यथ अर्थात्‌ असत्य बोलो तो जन्म से लेकर जो कुछ तुमने पुण्य किया है, वह सब कुत्तों को प्राप्त हो अर्थात्‌ वह सब पुण्य नष्ट हो जाय।
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