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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 88
ब्रह्मघ्नो ये स्मृता लोका ये च स्त्रीबालघातिनः । मित्रद्रुहः कृतघ्नस्य ते ते स्युर्ब्रुवतो मृषा ।।
ब्राह्मण, स्री तथा बालक की हत्या करनेवाले, मित्रद्रोही तथा कृतघ्न को जो नरक आदि लोक प्राप्त होते हैं, वे सब असत्य बोलते हुए तुम्हें प्राप्त होवें।
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