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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 87
ब्रूहीति ब्राह्मणं पृच्छेत्सत्यं ब्रूहीति पार्थिवम्‌ । गोबीजकाञ्जनैर्वैश्यं शूद्रं सर्वैस्तु पातकैः ।।
न्यायाधीश ब्राह्मणों से 'कहो', क्षत्रियों से “सत्य कहो”, वैश्यों से गौ, बीज और सोना चुराना पाप है । वह पाप तुम्हें असत्य गवाही देने पर लगेगा' तथा शूद्रो से 'तुम्हें सब पाप लगेंगे, यदि तुम असत्य गवाही दोगे? ऐसा (८।८९-१०१) कहकर गवाही लेवे।
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