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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 86
देवब्राह्मणसान्निध्ये साक्ष्यं पृच्छेदृतं द्विजान्‌ । उदङ्मुखान्प्राङमुखान्वा पूर्वाह्ने वै शुचिः शुचीन्‌ ।।
शुद्ध हृदय न्यायकर्त्ता देवता की प्रतिमा और ब्राह्मण के पास में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके खड़े हुए सत्यवक्ता द्विजों से (या अन्य जातीय साक्षियों से भी) पूर्वाह समय में (दोपहर के पहले) गवाही लेवे।
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