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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 84
मन्यन्ते वै पापकृतो न कश्चित्पश्यतीति नः । तांस्तु देवाः प्रपश्यन्ति स्वस्यैवान्तरपूरुषः ।।
पापी पुरुष समझते हैं कि “हमको कोई नही देखता'; किन्तु उनको (अग्रिम शलोक में कहे जानेवाले) देवता देखते हें तब अपने ही अन्त:करणों में स्थित पुरुष देखता है।
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