मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 83
आत्मैव ह्यात्मनः साक्षी गतिरात्मा तथाऽऽत्मनः । माऽवमंस्थाः स्वमात्मानं नृणां साक्षिणमुत्तमम्‌ ।।
आत्मा ही शुभ और अशुभ कर्मो का साक्षी (गवाह) है और आत्मा की गति भी आत्मा ही है, इस कारण मनुष्यों के श्रेष्ठ साक्षी आत्मा का (असत्य बोलकर) अपमान मत करो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें