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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 77
स्वभावेनैव यदब्रूयुस्तदूग्राह्मं व्यावहारिकम्‌ । अतो यदन्यद्विब्रयुर्धर्मार्थे तदपार्थकम्‌ ।।
साक्षी (भय या दबाव आदि न होने पर) स्वभावत: जो कुछ कहे न्यायाधीश को उसे ही ठीक मानना चाहिये; अन्य किसी कारण (भय, दबाव, शील या सङ्कोच आदि) से धर्मविरुद्ध निष्प्रयोजन बातें वह कहे तो उसे ठीक नहीं मानना चाहिये।
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