एको लुब्धस्त्वसाक्षी स्याद्वदङ्वयः शुच्योऽपि न स्त्रियः ।
स्रीबुद्धेरस्थिरत्वातु दोषैश्चान्येऽपि ये वृताः ।।
निर्लोभ एक भी साक्षी ठीक होता है, स्री-बुद्धि के अस्थिर होने से आत्मशुद्धियुक्त भी बहुत-सी स्त्रिया ठीक साक्षी नहीं होतीं, तथा चोरी आदि के दोषों से युक्त साक्षी भी (चाहे वे पुरुष ही क्यों न हों) ठीक नहीं होते।
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