देखने योग्य विषय में प्रत्यक्ष देखने तथा सुनने योग्य विषय में स्वयं सुनने से साक्षित्व (गवाही) ठीक होता है, उस विषय में सत्य कहनेवाला साक्षी धर्म, अर्थ से हीन नहीं होता है (अन्यथा असत्य कहनेवाला साक्षी धर्मच्युत तो होता ही है अर्थ दण्ड (जुर्माना आदि) होने से अर्थच्यूत भी होता है)।
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