साक्षियों के परस्पर विरुद्ध वचन कहने पर राजा (या राजा द्वारा नियुक्त न्यायाधीश) बहुमत को तथा दोनों के समान होने पर श्रेष्ठ गुणवालों को और उन (गुणियों) में भी विरोध आने पर क्रियानिष्ठों को (गोविन्दराज के मत से ब्राह्मणों को) प्रमाणित माने।
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