साहसेषु च सर्वेषु स्तेयसंग्रहणेषु च ।
वाग्दण्डयोश्च पारुष्ये न परीक्षेत साक्षिणः ।।
साहस कार्य (घर या गल्ले आदि में आग लगाना आदि), चोरी, आचार्यस्री-संग्रहण, वचन तथा दण्ड की कठोरता--इनमें साक्षियों की परीक्षा (८।६२-६९ के अनुसार), नहीं करनी चाहिये (किन्तु ८।६९-७० के अनुसार स्त्री-बालक आदि साक्षियों को भी स्वीकृत कर लेना चाहिये)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।