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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 71
साहसेषु च सर्वेषु स्तेयसंग्रहणेषु च । वाग्दण्डयोश्च पारुष्ये न परीक्षेत साक्षिणः ।।
साहस कार्य (घर या गल्ले आदि में आग लगाना आदि), चोरी, आचार्यस्री-संग्रहण, वचन तथा दण्ड की कठोरता--इनमें साक्षियों की परीक्षा (८।६२-६९ के अनुसार), नहीं करनी चाहिये (किन्तु ८।६९-७० के अनुसार स्त्री-बालक आदि साक्षियों को भी स्वीकृत कर लेना चाहिये)।
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