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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 7
स्त्रीपुंधर्मो विभागश्च द्यूतमाह्ृय एव च। पदान्यष्टादशैतानि व्यवहारस्थिताविह । ।
१६. स्त्री-पुरुष का धर्म, १७; पैतृक (पिता के) धन-सम्पत्ति या भूमि आदि का बटवारा करना और १८ जुआ खेलना या द्रव्यादि रखक्रर (बाजी लगाकर अर्थात्‌ दाँव पर धन आदि लगाकर) पशु (भेंडा, भेंसा आदि), पक्षी (मुर्गा, तीतर, बटेर आदि) को लडाना ये १८ स्थान व्यवहार (मुकदमे) की स्थिति में कहे गये हैं । राजा इन व्यवहार-स्थानो में (मुकदमो के विषयों में इसी प्रकार के अन्यान्य विवादस्थ विषयों में भी) परस्पर विवाद करते (झगड़ते) हुए लोगों के वंशादि-क्रमागत नित्यधर्म का विचारकर निर्णय (न्याय) करे।
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