त्रियाऽप्यसम्भवे कार्य बालेन स्थविरेण वा ।
शिष्येण बन्धुना वाऽपि दासेन भृतकेन वा ।।
उक्त स्थानों (८।६९) में दूसरे साक्षी नहीं मिलने पर बालक, वृद्ध, शिष्य, बन्धु, दास और कर्मकर (नौकर) को साक्षी बनाना चाहिये।
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