घर के भीतर, वन आदि में चोर आदि के शरीर में चोट आने या मारे जाने पर, जो भी कोई मिल जाय, उसे ही वादी और प्रतिवादी (मुद्द और मुद्दालह)दोनों पक्ष का साक्षी बनाना चाहिये (किन्तु ऋण आदि के लेन-देने में जिस किसी को साक्षी नहीं बनाना चाहिये।
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