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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 66
नार्तो न मत्तो नोन्मत्तो न क्षुत्तृष्णोपपीडितः । न श्रमार्तो न कामात्तों न क्रुद्धो नापि तस्करः ।
(बान्धवादि के विनाशादि के कारण) दुःखी, मत्त, पागल, भूख-प्यास से पीड़ित, थका, कामी, क्रोधी और चोर-इनको साक्षी नहीं बनावे।
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