नाध्यधीनो न वक्तव्यो न दस्युर्न विकर्मकृत् ।
न वृद्धो न शिशुर्नैको नान्त्यो न विकलेन्द्रियः ।।
अत्यन्त अधीन (गर्भ-दास या क्रीत-दास आदि) लोक निन्दित, क्रूर कर्म करनेवाला, बूढ़ा, बालक, अकेला, चाण्डाल और विकलेन्द्रिय इनको साक्षी नहीं बनाना चाहिये।
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