न साक्षी नृपतिः कार्यो न कारुककुशीलवौ ।
न श्रोत्रियो न लिङ्गस्थो न सङ्गेभ्यो विनिर्गतः ।।
राजा, कारीगर (पाचक; बढ़ई, लोहार आदि) नट-भाट आदि, वैदिक, ब्रह्मचारी तथा संन्यासी - इनको साक्षी न बनावे।
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