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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 62
आप्ताः सर्वेषु वर्णेषु कार्याः कार्येषु साक्षिणः । सर्वधर्मविदोऽलुब्धा विपरीतांस्तु वर्जयेत्‌ ।।
सब वर्णो में (ब्राह्मणों में भी) आप्तों (राग-द्रेष से रहित होकर निष्पक्ष बोलनेवालों) को, सब धर्मा के ज्ञाता, निर्लोभी-इन लोगों को सब वर्णो (ब्राह्मणों में भी) में साक्षी बनना चाहिये तथा इनके प्रतिकूल (राग-द्रेषपूर्वक पक्षपात से बोलनेवाले. धर्मज्ञानशून्य तथा लोभी) लोगों को (साक्षी बनाने में) छोड़ देना चाहिये।
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