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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 59
पृष्टाऽपव्ययमानस्तु कृतावस्थो धनैषिणा । त्र्यवरैः साक्षिभिभाव्यो नृपब्राह्मणसन्निधौ ।।
धन चाहनेवाले (मुददई के मुकदमा करने पर मुद्दालह) धन लेना स्वीकार न करे तो राजाधिकारी ब्राह्मण (न्यायाधीश) के सामने वादी (मुद्दई) कम से कम तीन साक्षियों (गवाहों) से अपनी बात को प्रमाणित करे।
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