अपदिश्यापदेशं च पुनर्यस्त्वपधावति ।
सम्यक् प्रणिहितं चार्थं पृष्टः सन्नाभिनन्दति ।।
तथा न्यायाधीश के 'क्यों तुमने रात में, एकान्त में या बिना किसी साक्षी के रहते या बिना कागज (स्टाम्प--हैंटनोट आदि) दिखवाये आदि के धन दिया, इत्यादि पूछने पर ऋणदाता सन्तोषजनक उत्तर न दे, जो ऋणदाता साक्षियों को एकान्त में ले जाकर बातचीत करे (साक्षी को सिखलावे),
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