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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 51
अपहृवे5 धमर्णस्य देहीत्युक्तस्य संसदि । अभियोक्ता दिशेह्देशं कारणं वाऽन्यदुद्दिशेत्‌ ।।
न्यायालय में न्यायाधीश क “इस धनी (ऋण देनेवाला) का धन दो” ऐसा कहने पर ऋण देनेवाला यदि मुकर जाय (ऋण लेने का निषेध कर दे) तो अर्थी (मुद्दई अर्थात्‌ ऋण देनेवाला) साक्षी या अन्यान्य प्रमाण (लेख आदि) बतलावे।
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